Anushthan

ANUSHTHAN

मंगल भात पूजा

Mangal Bhaat Puja

मंगल दोष पूजा वैदिक ज्योतिष में बताए गए मंगल दोष (कुज दोष) की शांति के लिए की जाने वाली एक महत्वपूर्ण धार्मिक पूजा है। जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह कुछ विशेष भावों (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश) में स्थित होता है, तब मंगल दोष बनने की मान्यता है। ऐसे में योग्य विद्वान पंडित द्वारा विधि-विधान से मंगल दोष पूजा कराई जाती है। धार्मिक विश्वास है कि इस पूजा से भगवान शिव, माता पार्वती और मंगल देव की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।

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कालसर्प दोष

Kalsarp Dosh

कालसर्प दोष वैदिक ज्योतिष में बनने वाला एक विशेष ग्रह योग माना जाता है। यह तब बनता है जब सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि—
ये सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। इस स्थिति को कालसर्प दोष या कालसर्प योग कहा जाता है।

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रुद्राभिषेक

Rudrabhishek

रुद्राभिषेक भगवान शिव की सबसे पवित्र और प्रभावशाली वैदिक पूजाओं में से एक है। इस अनुष्ठान में शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जाता है तथा रुद्राध्याय (श्री रुद्रम) और वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करते हैं।

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महामृत्युंजय जाप

Mahamrityunjay Jaap

महामृत्युंजय जाप भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र वैदिक मंत्र का जप है। इसे "मृत्युंजय मंत्र" या "त्र्यंबक मंत्र" भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जप से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, भय से मुक्ति तथा स्वास्थ्य एवं जीवन में आने वाली बाधाओं से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है।

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नवग्रह जाप

Navgrah Jaap

नवग्रह जाप वैदिक ज्योतिष में बताए गए नौ ग्रहों—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु की कृपा प्राप्त करने तथा उनके अशुभ प्रभावों की शांति के लिए किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है। इस जाप में प्रत्येक ग्रह के वैदिक मंत्रों का विधि-विधान से उच्चारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नवग्रह जाप से ग्रहों का संतुलन स्थापित होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

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नवचंडी/सतचंडी अनुष्ठान

Navchandi/Satchandi

नवचंडी / सतचंडी अनुष्ठान माँ आदिशक्ति दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान है। इस अनुष्ठान में दुर्गा सप्तशती (श्री चंडी पाठ) का विधि-विधान से पाठ, हवन, पूजन एवं देवी आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि यह अनुष्ठान जीवन की बाधाओं को दूर करने, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

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वास्तु दोष

Vastu Dosh

वास्तु दोष वह स्थिति मानी जाती है जब किसी भवन, घर, कार्यालय या भूमि का निर्माण वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होता। धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है, जिससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बाधाएँ आने की मान्यता है। वास्तु दोष की शांति के लिए वास्तु पूजा, वास्तु शांति हवन एवं वैदिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

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अर्क/कुंभ विवाह

Ark/Kumbh Vivah

पुरुषों के विवाह में आ रहे विलम्ब या अन्य दोषो को दूर करने के लिए किसी कन्या से विवाह से पूर्व उस पुरुष का विवाह सूर्य पुत्री जो की अर्क वृक्ष के रूप में विद्धमान है से करवा कर विवाह में आ रहे समस्त प्रकार के दोषो से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है, इसी विवाह पद्द्ति को अर्क विवाह कहा जाता है।

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विष दोष

Vish Dosh

विष योग को ज्योतिष शास्त्र में अशुभ योग की श्रेणी में रखा गया है। विष योग अगर किसी जातक की कुंडली में होता है तो ऐसे व्यक्ति को कामकाज में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही जीवन में संघर्ष भी बना रहता है। आइए जानते हैं विष योग क्या है इसका प्रभाव और उपाय।

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पितृ दोष

Pitra Dosh

पितृ दोष पूजन निवारण और इस पूजन से क्या क्या फल यजमान को प्राप्त होता है मुख्यपितृदोष तीन प्रकार का होता है| 1 त्रिपिंडी का पूजन होता है विष्णु लोक के पितरों के लिए सात्विक पिंड अर्पण करते हैं जो उनको विष्णुलोक में प्राप्त होता है ब्रह्मलोक के पितरों के लिए राजसी पिंडअर्पण करते हैं जॉन को ब्रह्मलोक में प्राप्त होता है...

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संतान गोपाल अनुष्ठान

Santangopal Anushthan

भगवान बाल कृष्णा स्वरूप संतान प्राप्ति के लिए विशेष संतान गोपाल अनुष्ठान कर्म संपादित किया जाता है भगवान बालकृष्ण की सेवा के द्वारा शीघ्र ही शुभ संतान की प्राप्ति होती है भगवान कृष्ण ने जिस प्रकार से सभी दुख दरिद्र सुदामा जी का दूर किया था उसी प्रकार भगवान बालकृष्ण अपनी दिव्य...

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बगलामुखी अनुष्ठान

Baglmukhi Anushthan

मां राज राजेश्वरी बगलामुखी पूजन के द्वारा सभी शत्रु पर विजय एवं काम क्रोध आदि पर नियंत्रण भगवती आराधना अनुष्ठान जाप के द्वारा राज्य धन व्यापार कार्यक्षेत्र मैं यश विजय लाभ आदि प्राप्ति होती है देवी आराधना से सभी प्रकार का सुख समृद्धि...

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चांडाल दोष

Chandal Dosh

ज्योतिष शास्त्र में गुरु चांडाल दोष को बेहद अनिष्टकारी योग माना जाता है. जब किसी जातक की कुंडली में बुद्धि के देवता गुरु और पाप ग्रह कहे जाने वाले राहु की युति होती है तब गुरु चांडाल दोष का निर्माण होता है.पंडित शुभम तिवारी बताते हैं। गुरु चांडाल दोष का मनुष्य के जीवन पर बेहद नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

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भैरव हवन

Bhairav Havan

स्वर्णाकर्षण भैरव काल भैरव का सात्त्विक रूप हैं, जिनकी पूजा धन प्राप्ति के लिए की जाती है, यह हमेशा पाताल में रहते हैं| ठीक वैसे ही जैसे सोना धरती के गर्भ में होता है, इनका प्रिय प्रसाद दूध और मेवा है| इनके मदिरों में मदिरा...

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ऋण मुक्ति पूजा

Rin Mukti Puja

ऋण मुक्ति पूजा एक हिंदू धार्मिक प्रथा है जिसमें ऋण बंधन से मुक्ति प्राप्त करने के लिए पूजा की जाती है। इसमें व्यक्ति भगवान से अपने ऋणों से मुक्त होने की प्रार्थना करता है तथा भगवान की कृपा और आशीर्वाद के लिए अनुरोध करता है। हिंदू धर्म में कर्ज का एक आध्यात्मिक महत्व होता है।...

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बगलामुखी हवन

Baglamukhi Hawan

माँ बगलामुखी का हवन, जिसे बगलामुखी यज्ञ भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जो शत्रुओं पर विजय, बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। बगलामुखी हवन के लाभ: शत्रुओं पर विजय: बगलामुखी हवन करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और भय से मुक्ति मिलती है...

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मूर्तिप्राण प्रतिष्ठा

Murti Pranpratishtha

सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा का बहुत ज्यादा महत्व है. मूर्ति स्थापना के समय प्राण प्रतिष्ठा जरूर किया जाता है. किसी भी मूर्ति की स्थापना के समय प्रतिमा रूप को जीवित करने की विधि को प्राण प्रतिष्ठा कहा जाता है. ‘प्राण’ शब्द का अर्थ है- जीवन शक्ति और ‘प्रतिष्ठा’ का अर्थ स्थापना से माना जाता है...

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ग्रहण दोष पूजा

Grahan Dosh Puja

परेशानी वाली बात:- 👉 चंद्र-राहु या सूर्य-राहु की युति को ग्रहण योग कहते हैं। यदि बुध की युति राहु के साथ है तब यह जड़त्व योग है। इन योगों के प्रभाव स्वरुप भाव स्वामी की स्थिति के अनुसार ही अशुभ फल मिलते हैं। वैसे चंद्र की युति राहु के साथ कभी भी शुभ नही मानी जाती है।...

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